मंगलवार, 15 मई 2012

उत्तराखण्ड राजैऽ मुख्य भासा

उत्तराखण्ड राजमा द्वि मुख्य भासा छन - गढ़वळि अर कुमाँउनी। कुमाँउनी भासातैं गढ़वळिमा कुमौनी बि ब्वल्ये जांदु। ये द्विय्या भासा एक हैंकाकि बैणी छन। द्विय्योंकू मूल एक्कि च, माने यूंकि ब्वे वैदिक संस्कृत भासा च जैन कालांतरमा खस प्राकृत (पहाड़ी प्राकृत) तैं जनम दिनि अर येइ पहाड़ी प्राकृतबिटि गढ़वळि अर कुमौनी भासा निक्लिन। गढ़वळि भासा गढ़वाळ मण्डलमा अर कुमौनी भासा कुमौं मण्डलमा ब्वल्ये जांदन. इन नी च कि उत्तराखण्डमा येइ द्वि भासा छन। उत्तराखण्डमा त कई हौर भासा बि छन जूं मद्दे जौनसारी, रौंग्पा, थारुवाटी, बुक्सा, जाडी, जौहारी, ब्यांगसी, चौदांगसी आदि मुख्य छन। यूंमन कई भासा त विलुप्ति कि कगार फर छन। रौंग्पा, जाडी, जौहारी, ब्यांगसी, चौदांगसी आदि भोटिया भासा छन अर सीमान्त छेत्रुमा ब्वल्ये जांदन। जौनसारीतैं कई भासा-बिज्ञानी गढ़वळिकि एक बोलि मण्दन पण जौनसारीमा कथ्गै सब्द अलग छन अर बाक्य-बिन्यासमा बि फरक छैंच। गढ़वळि उत्तराखण्डैऽ सबसे ठुल्ली भासा च अर सबसे जादा छेत्रमा ब्वल्ये जांदि। गढ़वळिमा भासाकू साहित्य भौत समिर्ध च अर गढ़वळिमा कई किताबि बि छपेंदि छन।

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