गढ़वळि भासा भारतका उत्तराखण्ड
प्रान्तका गढ़वाळ छेत्राऽ पौड़ि गढ़वाळ, टीरि गढ़वाळ, देरादूण, हरद्वार, उत्तरकासी, चमोळि अर रुद्रपरयाग जनपदुमा बोल्ये
जाणवळि एक प्राचीन भासा च । भासाबिग्यान्यों अर इतिहासकारौं अनुसार गढ़वळि भासा आठवीं सताब्दिमा पैदा ह्वेगि छै।
आज हमारि या प्राचीन अर समिर्ध भासा हरचणि च किलैकि हम अपड़ि भासाकू जादा प्रयोग नि करणा छाँ । हमारि नै छिवांळ (पीढ़ी) ईं भासाथैं छ्वड्न लगीं च । जु आज हम अपड़ि भासा बचौणौऽ परयास नि करला त भोळ ईंन लुप्त ह्वे जाण। ये ब्लॉगकू उद्देस्य च गढ़वळि भासा अर साहित्याकू परचार-परसार
करण अर येसे संबंधित जानकारी यख सुलभ करौण। जै भारत, जै उत्तराखण्ड, जै गढ़देस!!!
आज हमारि या प्राचीन अर समिर्ध भासा हरचणि च किलैकि हम अपड़ि भासाकू जादा प्रयोग नि करणा छाँ । हमारि नै छिवांळ (पीढ़ी) ईं भासाथैं छ्वड्न लगीं च । जु आज हम अपड़ि भासा बचौणौऽ परयास नि करला त भोळ ईंन लुप्त ह्वे जाण। ये ब्लॉगकू उद्देस्य च गढ़वळि भासा अर साहित्याकू परचार-परसार
करण अर येसे संबंधित जानकारी यख सुलभ करौण। जै भारत, जै उत्तराखण्ड, जै गढ़देस!!!
साकेत, आपक ब्लॉग देखिक भोत दिल खुश ह्वे। मै कुकरेतीजीक पत्रिका उत्तराखंडी ई पत्रिका नियम सी पढ़दों। इ पत्रिका भोत उत्तम च। आप अपरी भासाक प्रति जागरूक छै, जाणीक भोत अच्छू लगी। आप जन युवागण सी यी अपेक्षा च। मै आपक ब्लॉग तैं फलणो फूलणोक कामना करदों।
जवाब देंहटाएं